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क्यों होते है जुड़वाँ बच्चे जानिये इसका कारण ……..

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जाने जुड़वाँ बच्चे होने के कारण……………..

हैलो दोस्तों ! आज एक बार फिर आप सभी का स्वागत है ।हम सभी कई बार सुनते है कि किसी को जुड़वाँ बच्चे हुए है या फिर किसी को एक साथ तीन बच्चे पैदा हुए है । जुड़वाँ बच्चो को ट्विन्स (twins )और एक साथ तीन पैदा हुए बच्चो को ट्रिपलेट्स (ट्रिप्लेट्स) कहते है ।जब ऐसा होता है तो कई बार लोग सोच में पड़ जाते है कि ऐसा क्यों होता है ।ऐसा हर महिला के साथ नहीं होता । जुड़वाँ बच्चो के बारे में कुछ मिथ्या बाते भी की जाती है ।वही इनके पीछे कुछ साइंटिफिक कारण भी होते है ।आज हम आपको यही जानकारी देंगे कि जुड़वाँ बच्चे होने के पीछे क्या कारण होते है ??

जुड़वाँ बच्चो का निर्माण





जुड़वाँ बच्चो का निर्माण दो तरह से होता है ।इन्हे हम मैनोज़ाइगॉटिकऔर डायज़ाइगॉटिक कहते है। मैनोज़ाइगॉटिक बच्चे वो होते है जो देखने में एक दूसरे से बिल्कुल अलग होते है ।ऐसे बच्चों की आनुवांशिक संरचना अलग होती है और डायज़ाइगॉटिक बच्चे वो होते है जो एक से दिखाई देते है ।ऐसे बच्चों की आनुवांशिक संरचना एक होती है।

जुड़वाँ बच्चो के प्रकार

आइडेंटिकल ट्विन्स : जो बच्चे एक ही एग से पैदा होते है उन्हें आइडेंटिकल कहा जाता हैं। ऐसा तब होता है जब एक एग एक स्पर्म से फर्टिलाइज होता है। इसके बाद फर्टिलाइज्ड एग दो या उससे ज्यादा हिस्सों में बंट जाता है। यह काफी रेयर होता है। ऐसे बच्चों का चेहरा और नेचर बिल्कुल मिलता-जुलता होता है।




फ्रेटरनल ट्विन्स :जो बच्चे अलग-अलग एग से पैदा होते है उन्हें फ्रेटरनल कहा जाता हैं। ऐसा तब होता है जब दो या उससे ज्यादा एग अलग-अलग स्पर्म से फर्टिलाइज होते हैं।इन बच्चो का चेहरा व नेचर अलग अलग होता है।

जुड़वाँ बच्चो के कारण

आनुवांशिक कारण (family history )

जुड़वाँ बच्चो का होना महिला के परिवार से भी जुड़ा होता है ।यदि किसी महिला के परिवार (माँ, बहन , दादी) में पहले से किसी को जुड़वाँ बच्चे पैदा हुए हो तो उन्हें भी जुड़वाँ बच्चो के होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

जीवनशैली (lifestyle )

किसी महिला की जीवनशैली भी जुड़वाँ बच्चो की प्रकिर्या पर प्रभाव डालती है ।अगर कोई महिला ज्यादा नॉन वेज और ज्यादा कैलोरी वाला खाना खाती है तो उन्हें भी जुड़वाँ बच्चे होने की सम्भावना अधिक रहती है।

Fertility Treatment

अगर कोई महिला फर्टिलिटी ट्रीटमेंट जैसे IVF या गर्भनिरोधक गोलियों का ज्यादा उपयोग करती है तो उन्हें भी जुड़वाँ बच्चो की सम्भावना अधिक रहती है ।



उम्र का प्रभाव (Age )

जुड़वाँ बच्चे होना महिला की उम्र पर भी निर्भर करता है ।जो महिलाये 30 -40 की उम्र में माँ बनती है उनमे जुड़वाँ बच्चे होने की सम्भावना ज्यादा रहती है और मल्टीपल प्रेगनैंसी के आसार भी ज्यादा होते है।

ऊंचाई व वजन

जिन महिलाओ की ऊंचाई व वजन अधिक होता है उनमे भी मल्टीपल प्रेगनेंसी के आसार ज्यादा होते है।

दोस्तों ये थी हमारी जानकारी जो जुड़वाँ बच्चो से संबंधित थी जो आपके कई सवालों का जवाब दे सकती है ।अगर आपको ये सही लगे तो इसे अधिक से अधिक शेयर करे ।
धन्यवाद …..

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