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जाने लगातार बढ़ रहे यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन( UTI) के कारण, लक्षण और बचाव के कुछ आयुर्वेदिक उपाय

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यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन( UTI) के कारण लक्षण और बचाव के आयुर्वेदिक उपाय

नमस्कार दोस्तों आज एक बार फिर आयुर्वेद में आपका स्वागत है। दोस्तों आज हम बात करेंगे यूरीनरी ट्रैक्ट संक्रमण (UTI) की। दोस्तों मूत्र मार्ग में होने वाले बैक्टीरिया संक्रमण को यूरीनरी ट्रैक्ट संक्रमण कहते हैं UTI सूक्ष्मजीवों से होने वाला संक्रमण है यह संक्रमण होना एक आम बात है। पुरुषो से अधिक यह संक्रमण महिलाओं में देखा जा सकता है। 15 से 40 की उम्र के बीच यह समस्या अधिक पाई जाती है लगभग 40 % महिलाएं अपने पुरे जीवन काल में इस संक्रमण से ग्रसित जरूर होती है। यह संक्रमण मूत्र मार्ग में कही भी हो सकता है जैसे गुर्दे, मूत्राशय, मूत्रवाहिनी आदि किसी भी अंग में हो सकता है। आधुनिक समय में अगर देखा जाए को इसका सबसे बड़ा कारण वेस्टर्न स्टाइल के टॉयलेट है जिनके कारण संक्रमण का जोखिम अधिक बढ़ जाता है। अस्वच्छ शैचालयों का इस्तेमाल करना करने से UTI का खतरा अधिक बढ़ जाता है अगर बात नौकरी पेशा महिलाओं की की जाए तो यह रोग हर दूसरी महिला को अपनी चपेट में ले लेता है। यह रोग हालांकि बहुत खतरनाक नहीं है लेकिन अगर समय रहते ध्यान दिया जाए तो यह किडनी तक को प्रभावित कर सकता तो चलिए दोस्तों जानते है।

 

यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के लक्षण

  • मूत्रमार्ग और मूत्राशय की परतो पर सूजन आना।
  • बार बार पेशाब आना और पेशाब में जलन और दर्द महसूस होना।
  • असमय पेशाब आने का आना।
  • पेशाब में खून और बदबू आना।
  • पेट के निचले हिस्से में दर्द हल्का दर्द होना।
  • बार बार ठण्ड लगना तथा बुखार आना।

यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के कारण

  • अत्यधिक सम्भोग।
  • मधुमेह।
  • दस्त लगना।
  • मूत्रमार्ग का अवरुद्ध होना।
  • मूत्रमार्ग या गुर्दे में पथरी होना।
  • गर्भनिरोधक दवाइयों का उपयोग करना।
  • गर्भावस्था।
  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और।
  • एंटीबॉयोटिक दवाइयों का अधिक उपयोग करना।

यूरीनरी ट्रैक्ट संक्रमण से बचाव

  • ज्यादा मात्रा में पानी पीना।
  • तम्बाकू और शराब जैसे नशो से दूर रहना।
  • सम्भोग के तुरंत बाद मूत्र का त्याग करना।
  • नहाने के लिए बाथ टब की इस्तेमाल ना करना।
  • खुले और कॉटन के कपडे पहनना।

यूरीनरी ट्रैक्ट संक्रमण से बचाव के आयुर्वेदिक उपाय

अनार का सेवन……!

दोस्तों यूरीन ट्रैक्ट संक्रमण से बचाव के लिए आप बहुत से आयुर्वेदिक नुस्खों का उपयोग कर सकते है। शरीर में बैक्टीरिया को ख़त्म करने के लिए डॉक्टरों द्वारा अक्सर अधिक तरल पदार्थ का उपभोग करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में यदि आनर का उपयोग किया जाए तो संक्रमण से बचा जा सकता है अनार एंटीऑक्सिडेंट्स से भरा होता है। अनार में पाये जाने वाले गुण UTI को बढ़ने से रोकते है यूरीनरी ट्रैक्ट संक्रमण के बचाव के लिए अनार के रस का सेवन एक अच्छा उपाय है। यह शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है साथ ही शरीर में बढ़ रहे बैक्टीरिया को भी ख़त्म करता है। इसके एंटीऑक्‍सीडेंट गुण जीवाणुओं को मूत्र मार्ग में प्रवेश करने से रोकते है और इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत बनाते है, जिससे इन्फेक्शन से बचा जा सकता है।

 


इसके लिए आप आनर का कितना भी सेवन कर सकते है आप इसके दानो को सीधा भी खा सकते है साथ ही इसके जूस का भी सेवन कर सकते है। आनर का सेवन रात के समय ज्यादा अच्छा माना गया है। यह शरीर की सभी बीमारियों को ख़त्म करने के लिए बहुत अच्छा उपयोग है।

नींबू का सेवन…….!

दोस्तों जिन पदार्थो में विटामिन सी अधिक मात्रा में पाया जाता है वो पदार्थ UTI को बढ़ने से रोकते है इसलिए निम्बू का सेवन भी आपके स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। यह विटामिन सी और शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट का एक समृद्ध स्रोत है जो मूत्रवर्धक के रूप में काम करता है। इसलिए नींबू का सेवन भी यूरीनरी ट्रैक्ट संक्रमण को कम करने के लिए उपयोगी है।

 

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