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दीवाली पर माँ लक्ष्मी और गणेश की कैसे करे पूजा जिससे आपको मिले माँ का आपार प्रेम और आशीर्वाद

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दीवाली पर गणेश व माँ लक्ष्मी की पूजा करने की सम्पूर्ण विधि जाने

जय माता दी ! दोस्तों दीवाली का त्यौहार हमारे देश में बड़े ही चाव और हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है ।ये त्यौहार एक धर्म में ही नहीं बल्कि सभी धर्मो में मनाया जाता है ।इस त्यौहार को शक्ति और साधना का प्रतीक माना जाता है। धर्म कोई भी हो लेकिन इस सभी लोगो के मन में ख़ुशी और प्रेम का दीपक जलता है ।लोग घरो में साफ सफाई करते है ।दीवाली वाले दिन घरो में कई तरह के पकवान बनाये जाते है और जो सबसे विशेष कार्य होता है वो है माँ लक्ष्मी की पूजा करना ।






दीपावाली के अवसर पर लक्ष्मी माता को प्रसन्न करने के लिए आप घर की साज-सजावट पर खूब ध्यान देते हैं। लेकिन साज सजावट काफी नहीं है। लक्ष्मी माता को प्रसन्न करने के लिए सबसे जरूरी है कि आपकी पूजा विधि विधान पूर्वक हो। इसलिए दीपावली की रात गणेश व लक्ष्मी के साथ कुबेर महाराज की भी पूजा करें। कुबेर देवताओं के खजांची माने जाते हैं। दीपावली में लक्ष्मी माता के साथ भगवान विष्णु की भी पूजा होती है।

सभी लोग अपनी तरफ से माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए बहुत से प्रयत्न करते है और पूजा भी करते है क्योकि माँ लक्ष्मी धन की देवी मानी जाती है ।दीवाली वाले दिन माँ लक्ष्मी के साथ श्री गणेश जी की पूजा का भी विधान होता है ।आज हम आपको बताएंगे की दीवाली के दिन माँ लक्ष्मी की पूजा किस तरह करे ताकि आपको माँ का पूरा आशीर्वाद मिल सके और इस पूजा में आपको किन किन चीजों की जरूरत होगी ।तो चलिए जानते है माँ लक्ष्मी की पूजा करने की विधि और उसकी तैयारी के बारे में :-



  • सबसे पहले आप एक चौकी ले और उसे साफ़ करके उस पर एक लाल कपड़ा बिछा ले।फिर चौकी पर माँ लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ती को रखे ।ध्यान रहे की मूर्ती का मुख पूर्व या पश्चिम में रहे ।मूर्ती इस तरह रखे की माँ लक्ष्मी जी की मूर्ती गणेश जी के दाहिने तरफ हो और विष्णु जी की मूर्ति माँ के बाई तरफ हो।
  • अब आप मूर्ती के सम्मुख बैठ जाये और कुछ चावल नीचे रख कर उस पर कलश को रखे ।ये कलश आपको माँ लक्ष्मी के पास रखना है।
  • अब नारियल को लाल कपड़े में इस तरह लपेटे ताकि उसका आगे का भाग दिखाई देता रहे और फिर उसे कलश के ऊपर रख दे ।इस कलश को वरुण का प्रतीक माना जाता है।
  • अब दो बड़े दीपक ले और उनमे से एक को तेल से भर ले और दूसरे को घी से ।एक दीपक को मूर्तियों के चरणों में रखे और दूसरे को चौकी के दाहिने तरफ रख दे ।

  • मूर्तियों वाली चौकी के सामने छोटी चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। कलश की ओर एक मुट्ठी चावल से लाल वस्त्र पर नौ ग्रहो की प्रतीक नौ ढेरियां बनाएं। गणेशजी की मूर्ती की ओर चावल की सोलह ढेरियां बनाएं। ये सोलह मातृका की प्रतीक हैं। नवग्रह व षोडश मातृका के बीच स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। इसके बीच में सुपारी रखें व चारों कोनों पर चावल की ढेरी रख दे ।
  • सबसे ऊपर बीच में ॐ लिखें। छोटी चौकी के सामने तीन थाली व जल भरकर कलश रखें।थालियों की व्यवस्था इस प्रकार करें-
    1. ग्यारह दीपक
    2. खील, बताशे, मिठाई, वस्त्र, आभूषण, चन्दन का लेप, सिन्दूर, कुंकुम, सुपारी, पान
    3. फूल, दुर्वा, चावल, लौंग, इलायची, केसर-कपूर, हल्दी-चूने का लेप, सुगंधित पदार्थ, धूप, अगरबत्ती, एक दीपक।





किसी भी पूजा में सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा की जाती है। इसलिए आपको भी सबसे पहले गणेश जी की ही पूजा करनी चाहिए। हाथ में पुष्प लेकर गणपति का ध्यान करें और पूजा करे ।पूजा के बाद गणेश जी को प्रसाद अर्पित करें। फिर उसके बाद माँ लक्ष्मी की पूजा करे और वो सभी चीजे माँ को अर्पित करे जो माँ को प्रिय है ।माँ लक्ष्मी को फूलो की माला भी चढ़ाये और भोग भी लगाए । लक्ष्मी देवी की पूजा के बाद भगवान विष्णु एवं शिव जी पूजा करनी चाहिए ।फिर गल्ले की पूजा करें। पूजन के पश्चात सपरिवार आरती और क्षमा प्रार्थना करें।

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