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दीवाली मनाने के कुछ ऐतिहासिक और पौराणिक तथ्य जिन्हें लोग आज भी नहीं जानते, जिन कारणों से दीवाली सभी धर्मो में मनाई जाती है….!

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दीवाली मानाने के ऐतिहासिक और पौराणिक कारण……..

जय माता दी!  दोस्तों आज हम आपको हर्षोउल्लास से मनाये जाने वाले विशेष पर्व दीवाली के कुछ रोचक तथ्यों के बारे में बताएंगे। दोस्तों सभी दीवाली जैसे महापर्व को बड़ी ही धूम धाम से मनाते है लेकिन इसको मनाये जाने के जो कारण उन्हें सभी लोग नहीं जानते। तो दोस्तों आज हम आपको दीवाली मनाये जाने के कारणों के बारे में बताएंगे। कुछ लोगों का कहना है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा श्री राम चंद्र जी लंका के राजा रावण का वध करके अयोध्या वापस लौटे थे, उनके अयोध्‍या आने की खुशी में दीपावली का त्‍योहार मनाया जाता है। लेकिन दीपावली मनाने के पीछे अलग अलग राज्‍यों और धर्मो में अलग-अलग कारण व्‍याप्‍त हैं। धर्म कोई भी हो मगर इस दिन सभी लोगों के मन में उल्‍लास और प्रेम का दीप जलता है। हम सभी अपने घरो की साफ-सफाई करते हैं, घरों में कई पकवान बनते हैं। माँ लक्ष्मी और श्री गणेश जी का पूजन किया जाता है मिठाइयाँ बाटी जाती है।

अब हम आपको बताते है दीवाली बनाने के कुछ पौराणिक और ऐतिहासिक तथ्यों के बारे में……!

भगवान राम की रावण पर विजय-

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को भगवान राम जी लंका पर विजय प्राप्त करके और अपना चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या वापिस लोटे थे। उनके अयोध्‍या लौटने की खुशी में वहां के निवासियों ने दीप जलाकर उनका स्‍वागत किया था और खुशी मनाई और मिठाईया बांटी। उसी दिन से यह दिन दीपावली का त्‍यौहार के रूप में मनाया जाने लगा।

पांडवो का वनवास-

कार्तिक मास की अमावस्या के दिन महाभारत के अनुसार पांडवो का वनवास पूरा हुआ था। लोगों ने उनके वनवास पूरा होने की ख़ुशी में घी के दिये जलाए और और अपने घरों को खूब सजाया था इसलिए भी दीवाली का पर्व मनाया जाता है।

 

श्री कृष्ण ने किया था नरकासुर का वध-

दीवाली के एक दिन पहले राक्षस नरकासुर ने 16,008 औरतों का अपहरण कर लिया था तब भगवान श्री कृष्ण ने असुर राजा का वध करके सभी औरतों को मुक्‍त किया था,और उनसे विवाह भी किया था तभी से कृष्ण भक्तिधारा के लोग इसी दिन को दीपावली के रूप में मनाते हैं।

भगवान विष्णु जी का नरसिंह अवतार –

पौराणिक कथा के अनुसार यह भी माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण करके हिरण्यकश्यप का वध किया था। इसी दिन समुद्रमंथन के दौरान माँ लक्ष्मी व धन्वंतरि भी प्रकट हुए थीं।

सम्राट विक्रमादित्य का राज तिलक-

कहा जाता है कि हमारे देश के सबसे बड़े सम्राट विक्रमादित्य जिन्होंने पूरी दुनिया पर राज किया उनका राज तिलक भी कार्तिक अमावस के दिन ही किया गया था इस दिन के उपलक्ष में भी दीवाली पर्व मनाया जाता है।

सिक्‍खों के लिए है खास दिन-

इस दिन सभी सिक्‍ख अपने तीसरे गुरू अमर दास जी का आशीर्वाद लेने के लिए इक्‍ट्ठा होते हैं। 1577 में इसी दिन स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास हुआ था, और इसके अलावा 1619 में कार्तिक अमावस्या के दिन सिक्खों के छठे गुरु हरगोबिन्द सिंह जी को जेल से रिहा भी किया गया था। इसी आधार पर सिख भी दीवाली को बड़ी धूम धाम से मानते है।

 

जैनियो के लिए खास दिन-

दीपावली के दिन 527 ईसापूर्व जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर को निर्वाण प्राप्त हुआ था। इसी दिन भगवान महावीर के प्रमुख गणधर गौतम स्वामी को भी कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इसीलिए दीप और रोशनी के त्योहार दिवाली को जैन धर्म में भी धूमधाम से मनाया जाता है। जैन ग्रंथों के मुताबिक महावीर भगवान ने दिवाली वाले दिन मोक्ष जाने से पहले आधी रात को आखिरी बार उपदेश दिया था जिसे ‘उत्तराध्ययन सूत्र’ के नाम से जाना जाता है। भगवान के मोक्ष में जाने के बाद वहां मौजूद जैन धर्मावलंबियों ने दीपक जलाकर रोशनी की और खुशियां मनाईं। तभी से जैन धर्म में दीवाली का पर्व मनाया जाता है।

आर्य समाज की स्‍थापना के रूप में-

इस दिन आर्य समाज के संस्‍थापक महर्षि दयानन्द ने भारतीय संस्कृति के महान जननायक बनकर दीपावली के दिन अजमेर के निकट अवसान लिया था। इसके अलावा मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में दौलतखाने के सामने 40 गज ऊँचे बाँस पर एक बड़ा दीप जलाकर लटकाया जाता है। वहीं शाह आलम द्वितीय के समय में पूरे शाही महल को दीपों से सजाया जाता था इस मौके पर हिन्दू और मुसलमान दोनों मिलकर पूरे हर्ष और उल्‍लास के साथ त्‍योहार मनाते थे।

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