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बबूल की गोंद से करें, शरीर की सभी बीमारियों का इलाज।

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बबूल की गोंद के फायदे।

नमस्कार दोस्तों ! आयुर्वेद में आपका एक बार फिर से बोहत बोहत स्वागत है दोस्तों आज हम आपको बबूल की गोंद से होने वाले फायदों के बारे में बताने जा रहे है। बबूल के तने को जब काटा जाता है तो उसमें से कुछ पदार्थ विसर्जित होता है उसे ही गोंद कहा जाता है । दोस्तों बबूल की गोंद हमारे शरीर को तंदरुस्ती प्रदान करती है। यह हमारे शरीर में ऊर्जा बनाएं रखती है दोस्तों बबूल की गोंद आंतो को मजबूत बनाकर हमारे पाचन तंत्र को मजबूत बनती है यह हमारे फेफड़ो के लिए बहुत ही लाभकारी होती है इसके सेवन से सीने में जकड़न तथा सीने के दर्द में आराम मिलता है । गोंद पुरुषों के लिए बहुत ही ज्यादा लाभकारी होती है यह उनके पौरुष को बढ़ती है सिर्फ ५-१० ग्राम बबूल की गोंद ही हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है इसका अधिक मात्रा में सेवन शरीर के लिए हानिकारक भी होता है। तो चलिए दोस्तों जानते है बबूल की गोंद के फायदे।

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कैंसर को रोकने में सहायक

दोस्तों बबूल की गोंद के अंदर ऐसे एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते है जो कैंसर जैसी भयानक बीमारी को बढ़ने से रोकने में हमारी सहायता करते है। यह हमारे शरीर में बढे हुए खराब कोलस्ट्रोल लेवल को कम करके अच्छे कोलस्ट्रोल लेवल को बढ़ाता है। इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट गुण हमारे खाद्य पदार्थो से निकलने वाले हानिकारक पदार्थो को नष्ट करके हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करते है। इसलिए दोस्तों जितना हो सके बबूल की गोंद का सेवन जरूर करना चाहिए।

शुगर को कम करने में सहायक

अक्सर देखा जाता है की मधुमेह के रोगियों को भूख ज्यादा लगती है जिससे उनके रक्त में शर्करा का स्तर ओर भी ज्यादा बढ़ जाता है जिसे नियंत्रित करना बहुत ही ज्यादा जरुरी है दोस्तों बबूल की गोंद में पाए जाने वाले फाइबर भूख को कम करने में काफी सहायक होते है। जिससे की खाने की आदत को नियंत्रित करके रक्त शर्करा को कम किया जा सकता है। इसलिए मधुमेह के रोगियों को 5-10 ग्राम बबूल की गोंद का चूर्ण पानी या गाय के दूध के साथ सेवन करने की सलाह दी जाती है।

मासिक धर्म के विकार होने पर बबूल की गोंद का उपयोग

बबूल की गोंद का सेवन महिलाओ के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इसके सेवन से महिलाओ सम्बन्धी सभी रोगो को जड़ से खत्म किया जा सकता है। १० ग्राम बबूल की गोंद को भूनकर उसमें मिश्री मिलाकर दूध के साथ रोजाना खाने से महिलाओ के मासिक धर्म में होने वाले पीड़ा से छुटकारा पाया जा सकता है। साथ ही इसके सेवन से बाँझपन को भी दूर किया जा सकता है।

सिर के दर्द ओर जले हुए की जलन को ठीक करने में सहायक

बबूल की गोंद को पीसकर उसको पानी में घोलकर लेप बनाकर सिर पर लगाने से सिर दर्द में और जले हुए पर लगाने से जलन में बहुत जल्दी आराम मिलता है। इससे लेप और सेवन से कमर और घुटनो आदि के दर्द भी ठीक हो जाता है।




खांसी – जुखाम को ठीक करने में सहायक

बबूल के पेड़ की तासीर गर्म मानी जाती है इसलिए इसकी गोंद का सेवन सर्दियों के मौसम में अधिक मात्रा में किया जाता है यह हमारे शरीर को गर्मी प्रदान करती है जिससे की बुखार और खांसी – जुखाम जैसी बीमारी से छुटकारा मिलता है। सिर्फ 3 ग्राम बबूल की गोंद को रोजाना चूसने से ही किसी भी प्रकार के बुखार और खांसी जुखाम को ठीक किया जा सकता है ।

पेट के दर्द से छुटकारा

बबूल की गोंद में पाए जाने वाले विटामिन्स और फाइबर खाने को पचाने में हमारी सहायता करते है। बबूल की गोंद पेट में पैदा हो रही गैस और पेट की सूजन को कम करती है जिससे की पेट दर्द सम्बन्धी बीमारी से हम बचे रहते है। यह हमारी आंतो को मजबूत बनाकर शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। जिससे की शरीर स्वस्थ बना रहता है इसलिए पेट में दर्द होने पर बबूल की गोंद को पानी में घोलकर पीना चाहिए।

स्त्री और पुरुष दोनों की कमजोरी को दूर करे

यौन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बबूल की गोंद बहुत ही फायदेमंद होती है। पौरूष स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ाने के लिए 5-10 ग्राम बबूल की गोंद का सेवन करना चाहिए। यदि इसके सेवन से किसी प्रकार की हानि होती है तो इसके प्रभाव को कम करने के लिए पलाश की गोंद का इस्‍तेमाल किया जा सकता है। वीर्य रोग और शीघ्रपतन को दूर करने के लिए बबूल की 100 ग्राम गोंद को भून कर पीस लें और इसमें 50 पिसी हुई अश्‍वगंधा मिलाएं। इस मिश्रण को प्रतिदिन नियमित रूप से सुबह-शाम गर्म दूध के साथ सेवन करें। यह सभी प्रकार के वीर्य रोग को ठीक करने में मदद करता है।




दस्त लगने पर बबूल की गोंद का सेवन

दूषित पानी और बैक्‍टीरिया युक्‍त भोजन करना दस्‍त होने का प्रमुख कारण है। यदि आप इस तरह की बीमारी से परेशान है तो बबूल की गोंद का सेवन आपके स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है। 5 ग्राम बबूल की गोंद सुबह शाम पानी के साथ सेवन करने से एक दिन में ही दस्‍त को कम करने में मदद मिलती है।

बवासीर को ठीक करने में सहायक

बवासीर को ठीक करने के लिए भी बबूल की गोंद को उपयोग में लाया जाता है। बबूल का गोंद, कहरवा समई और गेरु 10-10 ग्राम लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसके 1 से 2 ग्राम चूर्ण को गाय के दूध की छाछ में मिलाकर 2 से 3 सप्ताह तक पीयें। यह बादी बवासीर और खूनी बवासीर दोनों रोगों में लाभकारी होता है।

 

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