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बवासीर का इलाज: आयुर्वेदिक और लेजर उपचार विधि में तुलना- Comparison between Piles Ayurvedic and Laser Treatment(In Hindi)

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बवासीर का इलाज: आयुर्वेदिक और लेजर उपचार विधि में तुलना- Comparison between Piles Ayurvedic and Laser Treatment(In Hindi)

 

बवासीर एक ऐसी बीमारी है जिसमे इंसान का ठीक से उठना- बैठना, चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है। बवासीर को अर्श भी कहा जाता है। इसे इंग्लिश में पाइल्स (Piles) कहते हैं। पाइल्स बीमारी बेहद तकलीफदेह होती है। इस बीमारी में गुदा द्वार (मल त्याग की जगह) की भीतरी और बहरी हिस्सों के साथ ही मलाशय (रेक्टम) के निचले हिस्सों में सूजन हो जाती है। सूजन होने की वजह से गुदा के अंदर वाले भाग में किसी जगह (ऐनस के अंदर) और बाहर किसी जगह पर मस्से जैसा उग आता है। मस्सा मल त्याग के दौरान अंदर- बाहर होता रहता है। इसे मेडिकल की भाषा में हेमरॉइड्स (बवासीर) कहा जाता है।

बवासीर रोग से पीड़ित रोगी को गंभीर कब्ज होता है। मल द्वार में असहनीय तकलीफ, कांटों जैसी चुभन होती है। मस्से, घाव और जलन इत्यादि जैसी गंभीर समस्याओं से जूझना पड़ता है। इन सभी समस्याओं से रोगी दिन-प्रतिदिन को कमजोर होता जाता है। कब्ज़ और मल द्वार पर मस्सा होने के चलते इंसान को मल त्याग (पाखाना) करने के लिए बैठने में भी असहनीय पीड़ा होती है। पेट ठीक तरह से कभी साफ नहीं होता है। बवासीर यानी पाइल्स लाइलाज नहीं है। इसका इलाज सुलभ है।


बवासीर का उपचार – Piles treatment in hindi

परम्परागत तरीके से इलाज होने के साथ ही अब बवासीर का इलाज लेजर विधि से भी होना शुरु हो गया है। यह नई तकनीक है। बवासीर के उपचार का परम्परागत तरीका ‘आयुर्वेदिक उपचार’ विधि है। दोनों विधियों की अपनी कुछ विशेषता है। आइए समझते हैं दोनों विधि क्या हैं और कौन बेहतर है।

 

 

बवासीर का उपचार आयुर्वेदिक विधि से

 

भारत की संस्कृति बहुत पुरानी है। चिकित्सा क्षेत्र में जब दुनिया में किसी नाम न था तो अपने देश में महान चिकित्सक ‘चरक’ का उद्भव पूरे सवाब पर था। बवासीर के लिए आयुर्वेदिक उपचार  की बात करें तो कुछ ऐसी औषधियां हैं, जिनके प्रयोग से बवासीर बीमारी में राहत मिलती है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का कहना है कि “क्वालीफाईड आयुर्वेद फिजीशियन की सलाह से अगर आयुर्वेदिक औषधियों का प्रयोग किया जाए तो काफी आराम मिल सकता है तथा बीमारी को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है”।

बवासीर की बीमारी में त्रिफला चूर्ण पेट की बीमारी के लिए अमृत स्वरूप माना जाता है। बवासीर से छुटकारा पाने के लिए रात में सोते समय 3 या 4 चम्मच त्रिफला चूर्ण सादा पानी के साथ लेना लाभकारी होता है।

आयुर्वेदिक विधि में जब बीमारी ज्यादा बढ़ जाती है तो क्षार सूत्र की सहायता से आयुर्वेदिक डॉक्टर गुदा द्वार पर हुए मस्सों को निकाल देते हैं। गुदा द्वार के मस्सों को निकालने के बाद बवासीर बीमारी से पूरी तरह छुटकारा मिल जाता है। यह विधि आपरेशन की अन्य दूसरी विधियों की अपेक्षा आसान व अधिक कारगर है लेकिन इस विधि में मरीज को दर्द होता है।



लेजर विधि से बवासीर का उपचार

बवासीर के लिए लेजर आधारित तकनीक अभी कुछ साल पहले ईजाद की गई है। यह बेहद कारगर तकनीक है। लेजर तकनीक से बवासीर का इलाज इतना सुविधाजनक स्थिति में होता है की मरीज के शरीर पर कहीं चीरफाड़ करने की जरूरत ही नहीं पड़ती है। इसे इस तरह भी समझा जा सकता है की लेजर के जरिये बवासीर का इलाज मरीज की सुविधा के अनुसार किया जाता है।

 

बवासीर का उपचार लेजर विधि से होने पर मरीज को भर्ती होने की भी जरूरत नहीं पड़ती

इस विधि में लेजर मशीन के जरिए बवासीर के मस्से को हटा दिया जाता है और मरीज को इस प्रक्रिया से दर्द भी नहीं होता है। लेजर आधारित तकनीक में मर्ज के स्थिति के अनुसार इलाज किया जाता है जैसे चरण 1 और चरण 2 में आने वाले मरीजों का इलाज विशेष लेजर की किरणों के जरिये किया जाता है। यह लेजर प्रक्रिया लगभग 10 मिनट में पूरी हो जाती है। लेजर आधारित इलाज में मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ती है।

 

बवासीर का उपचार लेजर विधि से होने पर टांका लगाने की भी जरूरत नहीं पड़ती

चरण 3 और चरण 4 में आने वाले मरीजों का उपचार करने के लिए लेजर मशीन को कटिंग मोड में रखा जाता है। लेजर की किरणें पाइल्स को सील कर देती हैं, इसलिए टांका लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। लेजर की किरणों के जरिये बवासीर को बेहतर तरीके से देखा जा सकता है और खून बहना बंद किया जा सकता है। बवासीर रोग से गंभीर रुप पीड़ित व्यक्ति का लेजर विधि में स्टेपलर के साथ उपचार होने पर बहुत जल्द स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

 

बवासीर का उपचार: आयुर्वेदिक और लेजर विधि में तुलना

तुलनात्मक रुप से देखे तो बवासीर के लिए लेजर तकनीक बहुत अधिक कारगर है। इस विधि से कठिन से कठिन पाइल्स भी बहुत कम समय में ठीक हो सकती है। दूसरी बड़ी विशेषता यह है की इस विधि में दर्द नाममात्र का भी नहीं होता। मरीज कुछ समय बाद अपने घर जा सकता है। वहीं आयुर्वेदिक विधि की बात करें तो यह भी कोई निचले पायदान पर नहीं है बल्कि अपने स्टेंडर्ड पर कायम है। लेकिन कुछ चीजें है जिनकी वजह से लेजर तकनीक अधिक कारगर है। आयुर्वेदिक विधि की अपेक्षा लेजर तकनीक को उत्कृष्टता प्रदान करने वाले कारणों में शामिल है:

  • बिना दर्द बवासीर का जड़ से खत्म हो जाना।
  • उपचार के बाद हुए घाव जल्दी भर जाते हैं।
  • बवासीर का उपचार लेजर तकनीक से होने के बाद मरीज मात्र आधा घंटे के भीतर अपने घर जा सकता है।


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