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बवासीर का इलाज इतना सरल भी हों सकता है वो भी गेंदे का फूल और काली मिर्च से, किसी ने सोचा न होगा

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बवासीर –
बवासीर दो प्रकार की होती है,खूनी बवासीर और बादी बवासीर | बवासीर गुदा (मलद्वार) में होने वाली एक सामान्य बीमारी है जब शरीर के निचले रेक्टम की तरफ गूदे में सूजन हो जाए तो यह बवासीर का रूप ले सकती है। इन्हें पाइल्स या हेमोर्रोइड्स भी कहा जाता है। बवासीर अत्यंत कष्टदायी रोग है यह रोग प्राय गलत खान पान से और पेट में कब्ज रहने की समस्या से शुरू होता है जितना पुराना यह रोग होता जाता है वैसे वैसे यह रोग फिशर, भगंदर आदि में बदलता जाता है जिसमें मलत्याग के समय रक्तस्राव तथा मस्से फूलने की समस्या होती है ।आयुर्वेद में इसे अर्श कहते हैं। यह बीमारी स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों में कुछ ज्यादा होती है।



बवासीर प्रमुख कारण Piles; causes

 

आज की बदलती जीवन शैली में बवासीर का प्रमुख कारण पेट की खराबी व पाचन तन्त्र का कमजोर होना है। इसके ओर कारण भी हैं जैसे-

मलत्याग के समय जोर लगाना

वन्शानुगत कारण

लम्बे समय तक कब्ज रहना

टॉयलेट में काफी देर तक बैठना

अतिसार

बवासीर प्रमुख लक्षण Piles; Symptoms

मलत्याग के समय रक्तस्राव –

बवासीर के रोगी जब मल त्यागते है तो रक्त बूंदों या धार के रूप में निकलता है जो दर्द रहित होता है। परन्तु जब बवासीर के साथ फिशर (गुद्चीर) भी होता है, तो रक्तस्राव के साथ दर्द भी हो सकता है।



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मलत्याग के समय मस्सों का बाहर निकलना –

बवासीर के रोगी जब टॉयलेट में बैठकर जोर लगाते है, तब मस्से बाहर आ जाते हैं व जब जोर हटाता है तो मस्से अन्दर चले जाते हैं। कभी कभी जब बवासीर पुरानी हो जाती है तो मस्सों को अन्दर करने के लिये उंगली का सहारा देना पड्ता है।जो की बहुत कष्टदायक होता है

म्यूकस का निकलना – कभी कभी मस्सों के स्थान पर श्लैष्मिक द्रव का स्राव भी हो सकता है।

Bawaseer Treatment

पहला प्रयोग –

बवासीर में गेंदे के फूल और काली मिर्च का यह प्रयोग बेहद उपयोगी साबित हो सकता है बवासीर में गेंदे के हरे पत्तों को काली मिर्च के साथ पीसकर चार दिन तक हर रोज एक बार सेवन करें. (गेंदे के फूल के नीचे डाली पर हरे पत्ते मिलेंगे). 10 ग्राम पत्ते और 7 काली मिर्च को मिला कर पीस लीजिये |




दूसरा प्रयोग –

गेंदे के फूल 10 ग्राम (पीले वाले), काली मिर्च के 7 दाने, दोनों को अच्छी तरह पीसकर आधा गिलास पानी में मिलाकर छानकर पीने से रक्तस्त्रावी बवासीर में लाभ होता है |

तीसरा प्रयोग –

रक्तस्त्रावी बवासीर में फूलों को पीस लीजिये, इस फूलों की लुगदी को देसी घी में भून लीजिये, इसमें मिश्री व सौंफ भी मिला लीजिये, इसको दिन में एक बार भोजने के दो घंटे पहले या बाद में सेवन करें सेवन के एक घंटे तक कुछ भी न खाएं न ही कुछ पिये |

बवासीर में ध्यान देने योग्य बाते –

बवासीर को दूर करने के लिए सबसे पहले कब्ज को दूर करें, कब्ज को दूर करने के लिए रात को सोते समय एक गिलास गर्म दूध के साथ एक चम्मच छोटी हरड का चूर्ण या एक चम्मच इसबगोल का छिलका खा कर सोयें और सुबह शौच जाने के बाद कम से कम 15 मिनट कपाल भारती ज़रूर करें आपको आराम ज़रूर आएगा और भोजन में फाइबर का भरपूर प्रयोग करें. अनाज भी मोटा पिसवाएं और चोकर का भरपूर प्रयोग करें |

इन प्रयोगो से आपकी बवासीर थोड़े ही दिनों में गायब हों जाएगी | दोस्तों समाज हित में इस पोस्ट को जरूर शेयर करे ताकि ओर लोग भी इन उपायों से फायदा उठा सके |

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