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शरीर के इन अंगो को बचा लो डायबिटीज के प्रभाव से,वरना हो सकता है भारी नुक्सान

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दोस्तों आज के समय में बहुत सारे इंसान ऐसे हैं जो डायबिटीज से प्रभावित हैं डायबिटीज ने अपना आतंक इतना फैला रखा है जिस पर नियंत्रण कर पाना मुश्किल हो रहा है डायबिटीज को अगर नियंत्रित ना किया जाए तो इसका असर सबसे ज्यादा किडनी, आंख, हृदय और ब्लड प्रेशर पर पड़ता है डायबिटीज की बीमारी में शरीर में ब्लड शुगर यह ब्लड ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है ऐसा तब होता है जब शरीर में हार्मोन इंसुलिन की कमी हो जाती है या इंसुलिन हमारे शरीर के साथ सही तालमेल नहीं कर पाते यह रोग किसी विषाणु या कीटाणु के कारण नहीं होता बल्कि मनुष्य जो भोजन करता है और वह भोजन हमारे शरीर में स्टार्च में बदलता है फिर वही स्टार्च गुलकोज में बदल जाता है जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती हैं गुलकोज को शरीर में अन्य कोशिकाओं तक पहुंचाने का काम इंसुलिन का होता है और मधुमेह के रोगियों के शरीर में इंसुलिन बनना बंद या फिर कम हो जाता है जिससे शरीर में ग्लूकोस या शुगर की मात्रा अधिक हो जाती है और इसी के कारण हमें अनेक कष्टों का सामना करना पड़ता है


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अगर हम डायबिटीज पर नियंत्रण नहीं कर पाते तो हमारे लिए यह एक चिंता का विषय है एक बार डायबिटीज होने पर हमारी सारी उम्र इसी डर में बीत जाती है कि कहीं यह ना हो जाए कहीं वह ना हो जाए और इसी डर के कारण अनेक बीमारियां हमारे शरीर में पनप जाती हैं घबराहट के कारण न तो वह व्यक्ति खुल कर जी सकता है और ना ही मर सकता है दोस्तों आज इसी के विषय में हम अपनी पोस्ट में बताएंगे कि कैसे और किन-किन अंगों को डायबिटीज में प्रभावित होने से बचाया जा सकता हैं और कैसे आप इसका उपाय कर सकते हैं

डायबिटीज के लक्षण

1 ज्यादा भूख लगना

डायबिटीज के मरीजों को भूख ज्यादा लगती है उन्हें हर पल भूख का एहसास होता रहता है और टाइम से पहले उन्हें भूख लग जाती हैं

2 अधिक नींद आना

डायबिटीज के पेशेंट को नींद भी अधिक आती है



3 प्यास ज्यादा लगना

जब हमारे शरीर में डायबिटीज होती है डायबिटीज के पेशेंट को प्यास भी अधिक लगती है उसे थोड़ी थोड़ी देर बाद पानी पीने की प्यास लगी रहती है

4 पेशाब ज्यादा आना

डायबिटीज के पेशेंट को पेशाब ज्यादा और बार-बार आता रहता है

5 शरीर के कुछ भागों का सुन होना

डायबिटीज के पेशेंट की अगर डायबिटीज ज्यादा बढ़ रही हो तो ऐसे मरीजों को एहसास होता रहता है कि उनके शरीर के कुछ अंग सुन हो रहे हैं उनके हाथ या पैर सो जाते हैं

6 आंखों से कम दिखाई देना

डायबिटीज के जो पेशेंट होते हैं धीरे-धीरे उनकी नजर कमजोर होती जाती है और उनकी आंखों से कम दिखाई देने लगता है रात को वह अच्छी तरह से देख नहीं पाते




7 किसी घाव को भरने में ज्यादा समय लगना

डायबिटीज के पेशेंट को अगर कहीं चोट लग जाती है तो उनके घाव भरने में बहुत अधिक समय लगता है चाहे वह घाव बड़ा हो या फिर छोटा उनके घाव देर में भरते हैं

8 जल्दी थकान होना

डायबिटीज के मरीज अगर थोड़ा सी भी शारीरिक मेहनत कर लेते हैं तो उनको थकान जल्दी होने लगती है

9 अचानक से वजन कम होना

डायबिटीज के मरीजों का वजन अगर पहले ज्यादा होता है और उनका अचानक से वजन कम होने लगता है तो यह भी एक लक्षण डायबिटीज का हो सकता है शुरु में तो यह एहसास ही नहीं होता कि वजन कम किस कारण से हो रहा है ,डायबिटीज के कारण है या फिर किसी और कारण से

किसी भी चीज से जल्दी इन्फेक्शन होना

डायबिटीज के मरीजों को किसी भी चीज से जल्दी से इंफेक्शन हो जाता है

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10 चिंता

डायबिटीज के मरीजों को किसी भी छोटी सी छोटी बात की चिंता होने लगती है जो कि उनके लिए काफी खतरनाक साबित हो सकती हैं

दोस्तों मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जिसका अगर सही तरह से ध्यान रखा जाए तो वह रोगी को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा सकती परंतु वक्त रहते इसका उपाय जरूर कर लेना चाहिए अगर डायबिटीज की बीमारी एक बार हो जाए तो यह इंसान की मृत्यु के साथ ही जाती है डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति अपने आपको कई बार बहुत बीमार महसूस करने लगता है उसे बात-बात पर चिंता होने लगती है उन पर खाने पीने की बहुत रोक-टोक हो जाती है जिससे वह अपने आप को सबसे अलग मानने लगता है डायबिटीज के पेशेंट को हर वक्त मीठा खाने से मना किया जाता है क्योंकि मीठा उनके लिए जहर साबित हो सकता है अगर शरीर में ब्लड शुगर बढ़ जाती है तो घबराहट हो जाती है और कई बार तो चक्कर भी आने लगते हैं अब आपको बता दें कि डायबिटीज शरीर के किन किन अंगों को ज्यादा प्रभावित करती है डायबिटीज में वैसे तो हर एक अंग का ख्याल बड़ी ही सावधानी से रखना चाहिए क्योंकि डायबिटीज व्यक्ति को अंदर से खोखला कर देती है जिससे वह बहुत कमजोर और बहुत कमजोर हो जाते हैं आज इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि आप अपने किन-किन अंगों को डायबिटीज से बचा सकते है और कैसे बचा सकते हैं



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1 आंखों पर डायबिटीज का प्रभाव

डायबिटीज में सबसे पहले आंखों पर ही बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता है जिसके कारण आंखें कमजोर और उनसे कम दिखाई देने लगता है लंबे समय तक रक्त में ग्लूकोज का स्तर ज्यादा रहने से रेटिना की छोटी रक्त नलिकाओं के क्षतिग्रस्त होने की आशंका रहती है इससे आंखों के सामने धुंधला पन सा छा जाता जाता है और मरीज को दिखना भी बंद हो जाता है तो ऐसे में उन्हें अगर यह बीमारी लंबे समय से है तो साल में एक या दो बार आंखों की जांच जरुर करवा लेनी चाहिए अगर रेटिना में कोई समस्या है तो रेटिनोपैथी से दृष्टि को होने वाला नुकसान रोका जा सकता है

2 पैरों पर डायबिटीज का प्रभाव
डायबिटीज व्यक्ति को चलते समय पैरों में दर्द होने लगता है अगर उन्हें पैरों में दर्द होता है तो समझो मांसपेशियां कमजोर हो गई है उनके पैर सुन्न भी हो जाते हैं ऐसा रक्त संचार में कमी से होता है ऐसे में पंजों में कोई छोटी सी चोट भी गंभीर घाव बना सकता है यह आसानी से ठीक भी नहीं होता पैरों की देखभाल के लिए डायबिटीज पर्सन को पैरों के उन हिस्ट्री को भी जांच लेना चाहिए जिन्हें वह देख नहीं पाता हो, अगर व्यक्ति के पैरों में दर्द या पैर सुन हो रहे हैं तो उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास जा कर डॉक्टर से सलाह मशवरा करना चाहिए क्योंकि देरी से भला इलाज है

3 हृदय पर डायबिटीज का प्रभाव

न्यूरोपैथी ऐसी अवस्था है जिसमें ह्रदय को ब्लड सप्लाई करने वाली धमनियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं यह हार्ट अटैक या लकवे का कारण भी बन सकती हैं कभी कभी हार्ट की काम करने की क्षमता भी कम हो जाती है इस अवस्था को डायबिटिक कार्डियोमायोपैथी कहते हैं जब उनका हृदय काम करना थोड़ा कम कर दे तो अगर उनका वजन ज्यादा हो तो वजन को घटा देना चाहिए एक्सरसाइज के जरिए हफ्ते में एक बार हार्टबीट 150 प्रति मिनट तक लाने का प्रयास करें



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4 दिमाग पर डायबिटीज का प्रभाव

डायबिटीज रोगियों को लकवे की आशंका 5 गुना ज्यादा होती हैं डायबिटीज से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली पर बुरा असर पड़ता है वह भावना पर नियंत्रण भी खो बैठता है उसे बात बात पर गुस्सा भी आने लगता है वह व्यक्ति डिप्रेशन में भी जा सकता है ऐसे व्यक्ति को फल वा सब्जियां ज्यादा खानी चाहिए फल व सब्जियां ज्यादा खाने से इस आशंका को कम किया जा सकता है 2 सप्ताह से उदास या फिर वह गुस्सा है तो डॉक्टर से तुरंत सलाह कर लेनी चाहिए

5 किडनी पर इसका प्रभाव

डायबिटीज का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है किडनी पर ,इस स्तिथि में किडनी फेल होने के 25 % मामलों में कारण डायबिटिक नेफ्रोपैथी होना सामने आया है इसलिए अनियंत्रित ब्लड शुगर शरीर में छोटी रक्त वाहिकाओं को क्षतिग्रस्त करती हैं ऐसे में ब्लड फ़िल्टर करने वाली किडनी की महीन वाहिकाओं को ज्यादा जोखिम होता है तो ऐसे में किडनी सही काम कर रही है या नहीं जानने के लिए साल में एक या दो बार ब्लड टेस्ट जरुर करना चाहिए यूरिन टेस्ट से नेफ्रोपैथी के खतरे का भी पता लगाया जा सकता है और इसे टाला भी जा सकता है

6 दांतों पर इसका प्रभाव

डायबिटीज के मरीजों को दांत संबंधी समस्या का सामना करना पड़ सकता है इससे मसूड़ों में रक्त संचार कम हो जाता है मसूड़े लाल रहते हैं और इन से खून आना शुरू हो जाता है लार भी इनके अंदर कम बनती हैं जो दांतों की मजबूती और पाचन के लिए बहुत ही जरूरी है ऐसे में आधे से 1 घंटे के बीच पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहना चाहिए हर 6 हफ्ते में डेंटिस्ट के पास जरूर जाना चाहिए

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